सोमवार, 29 अगस्त 2011

मां का भोजन

मंदिर में भगवान को भोजन
अकेले में, परदे में कराते है
और मां भी खुद की पीठ किये
अपने आंचल का
परदा बनाकर अकेले में
ही तो रीते पतीलों में से
भोजन करती है हमें
भोजन करानें के बाद।
और हमारी संतुष्ठि से
मां अपना पेट भरती है
अकेले में और ओट में भी।

1 टिप्पणी:

  1. और हमारी संतुष्ठि से
    मां अपना पेट भरती है
    अकेले में और ओट में भी..........bahut umdaa...

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